होली की पूर्वसंध्या पर सुनिए जनाब प्रदीप चौबे की आवाज़ में उनकी ये मज़ेदार हास्य कविता...

एक शाम मेरे नाम होली का मौसम आते ही उन हास्य कविताओं की याद आ जाती है जिनका हम कवि सम्मेलनों या पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से सुनने या देखने का बेसब्री से इंतज़ार किया करते थे। उस वक्त यानि अस्सी के दशक में आज की तरह टीवी चैनलों की भरमार नहीं थी। ले देकर एक दूरदर्शन था जो... [पूरी पोस्ट]
writer Manish Kumar
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[28 Feb 2010 09:58 AM]

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