कौन था खुदा मेरे लिये
बहुत मिले
दिल से खेलने
दिल को दुखाने वाले
बातों ही बातों में
और जख्म लगाने वाले
एक तुम ने ही न मांगा
कभी अपनी वफ़ा का हिसाब
बेगर्ज लगाये मरहम
न चाहा कभी कोई सबाब
बेरुखी को मेरी
मुक्कदर अपना बना
आंसुओं को अपनी
पलकों में छुपा
मांगी हर दुआ मेरे लिये
मैं ही न...
[पूरी पोस्ट]
मोहिन्दर कुमार
7
0
0
0
0
[17 Feb 2010 03:26 AM]



Shuffle








