कौन था खुदा मेरे लिये

दिल का दर्पण -  परावर्तन बहुत मिले दिल से खेलने दिल को दुखाने वाले बातों ही बातों में और जख्म लगाने वाले एक तुम ने ही न मांगा कभी अपनी वफ़ा का हिसाब बेगर्ज लगाये मरहम न चाहा कभी कोई सबाब बेरुखी को मेरी मुक्कदर अपना बना आंसुओं को अपनी पलकों में छुपा मांगी हर दुआ मेरे लिये मैं ही न... [पूरी पोस्ट]
writer मोहिन्दर कुमार
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[17 Feb 2010 03:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix