कहां गये तारे वो
स्स्स्सालालालाये तो बड़ा गजब होइगामैं कहती हूंआसमान में अब नहीं दिखतेउतने तारे, उतने चमकीलेतोड़कर टांग दिये गये हों जैसेगगनचुंबी इमारतों की खिड़कियों मेंरात ढलेऔर सड़क पर चुपचाप खड़े खंभों पर भीमुंह चिढ़ाते निहत्थे आसमान कोलेकिन बड़ा बेशर्म है फिर भीचांद...
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वर्षा
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[27 Feb 2010 11:01 AM]



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