वे बताएँगे और मनवाएँगे हमारे त्यौहार

एकोऽहम् क्या धुलेण्डी और क्या रंग पंचमी! दोनों ही इस बार लगभग बेरंगी निकलीं। कोई दूसरा त्यौहार होता तो इतना नहीं खटकता किन्तु होली ही तो वह इकलौता त्यौहार है हमारा जिसमें सब एक रंग हो जाते हैं। बाकी सारे त्यौहार तो कहीं न कहीं सीमा रेखा खींचे रखते हैं। होली ही... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

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[05 Mar 2010 19:30 PM]

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