प्रेम अबीर उछाल;होली लाई रंग गुलाल

मालवी जाजम......बोलोगा तो बचेगी मालवी आप सभी को होली की राम-रामलोक पर्वों का मज़ा ग्रामीण अंचलों में कुछ अलग ही रंगत के साथ मौजूद है.जैसी होली मैंने अपने मालवा के गाँवों में देखी है;खेली है वैसी बात अब शहरों में नज़र नहीं आती. मेरी बोली मालवी में राजस्थानी और गुजराती भाषा का वैभव बड़ी मधुरता के... [पूरी पोस्ट]
writer मालवी जाजम

मालवा

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[28 Feb 2010 03:28 AM]

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