मेरे निश्बदों को पढ़ के दिखा
लिखे को तो सब पढ़ लेते हैं,तू वो पढ़ जो अब तक मैनें ना लिखा,शब्दों की गहराई नापना सबके बस की बात नहीं,ग़र हो सके तो मेरे भावों के तल को छूकर दिखा,अपनी हर कविता मे से जाने कितने शब्द मिटा दिए,दिल की बात ज़ाहिर ना कर दें, ये सोच कर सब छिपा दिए,ढक दिया उन्हे...
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Gurnam Singh Sodhi
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[17 Feb 2010 00:48 AM]



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