जनाना राज चला गया है या आ रहा है?

जोगलिखी वे पढ़ीलिखी है. न भी है तो भी अर्थार्जन करती है. कार्यालय जाती है, शाम को घर लौटती है मगर उसे पुरूषों वाली सुविधा नहीं मिलती. अगर पुरूष सिगरेट पी सकता है तो आप भी पी सकती है. सिगरेट पियें, दारू पियें, चरस लें. मगर आजादी के नाम पर नहीं.... [पूरी पोस्ट]
writer संजय बेंगाणी

समाजलोकाचारमहिलानारी

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[08 Mar 2010 02:26 AM]

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