‘प्यार’ पर तीन मुक्तक

अनुभूति कलश १- यह कैसा है प्यार तुम्हारा, तुमने हमको किया नकारा , तेरे खातिर प्राण दे दिए, फिर क्यों मेरा प्यार है हारा? २- साँसों से साँसें टकराई, तब हमने थीं कसमें खाईं, साथ जिऐंगे, साथ मरेंगे, दिल ने दिल से करी सगाई । ३- प्यार हमें तरसाता भी है, प्यार हमें सहलाता... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

मुक्तकmuktak

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[02 Mar 2010 07:57 AM]

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