बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!
हम इधर काम की कमी के चलते जरा बिजी जैसा कुछ हो गये। इस बीच देखते हैं कि ससुरा बसन्त आकर छा गया है। लोग बिना स्माइली लगाये हंसी-मजाक की बातें करने लगे हैं। चुहलबाजी के भाव चमक गये हैं। जैसे कोई ब्लॉगर ब्लॉगिंग छोड़ने के बाद लोगों के अपनापे के चलते [...]...
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फ़ुरसतिया
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[14 Feb 2010 02:15 AM]



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