…मगर अब साजन कैसी होली

फुरसतिया होली आवत देखकर ,ब्लागरन करी पुकार, भूला बिसरा लिख दिया,अब आगे को तैयार। पिचकारी ने उचक के, रंग से कहा पुकार, पानी संग मिल जाओ तुम, बनकर उड़ो फुहार। कीचड़ में गुन बहुत हैं, सदा राखिये साथ, बिन पानी बिन रंग के ,साफ कीजिये हाथ। रंग सफेदा भी सुनो ,धांसू है... [पूरी पोस्ट]
writer फ़ुरसतिया

ஈழம்

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[03 Mar 2010 13:06 PM]

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