मेरी मौत के दिन

नवागंतुक मेरी मौत के दिनतुम्हें हिचकियाँ नहीं आयेंगीं ,औरतुम्हारी आँखों से लावे की नदियाँ सूख गयी होंग़ीं -उस दिन मैं मुर्गियों की तरहदूकानों में बिक रहा होऊँगा ,मांस के टुकड़ों में , तोल तोल कर ,ग्लानि से भरा हुआ , धूप में कपड़ों के साथसूखता मिलूँगा -और मेरी घोर... [पूरी पोस्ट]
writer Alok Shankar

९१ कोजी होमalok shankar

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[26 Feb 2010 05:38 AM]

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