वेदशास्त्रों से-परमात्मा के अलावा किसी अन्य की स्तुति नहीं करो (vedshastron se-pramatma ki stuti)
‘मा चिदन्यद् वि शंसत सखायो मा रिषणयत।’हिन्दी में भावार्थ-परमात्मा के अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति मत करो क्योंकि ऐसा करने से अपने मार्ग से हट जाओगे। ‘आ घा गमद्यति श्रवत् सहस्त्रिणीभिरूतिभिः। वाजेभिरुप नो हवम्।हिन्दी में भावार्थ-प्रभु का बल अनंत और उनके...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
10
0
0
0
1
[09 Feb 2010 22:53 PM]



Shuffle







