ठेकेदार !
ठेकेदार !बिन बुलाया कोई मेहमान न चलने दूँगा,पाक-ओ-कंगारू है बयमान न चलने दूँगा.मैं किसी और की दूकान न चलने दूँगा,नाम में जिसके जुड़े खान न चलने दूँगा.याँ जो रहना है वडा-पाँव ही खाना होगा!इडली-डोसा, पूरबी-पकवान; न चलने दूँगा.घाटी लोगों की जमाअत का भी...
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Mansoor Ali
social policing
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[09 Feb 2010 23:14 PM]



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