चार शब्द चित्र
चार शब्द चित्र 1- बने मेघ गर तुम, मैं नीर बनी हूँ , जब बरसे गरजकर, मैं धीर बनी हूँ । २- लगाई थी बिंदिया तेरा नूर लेकर, तेरे ही लबों की, मैं लाली बनी हूँ । ३- पिया जाम तुमने मैं मदिरा बनी हूँ, , बहके कदम जब, मैं संग -संग चली हूँ [...]...
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ramadwivedi
संवेदना की अनुभूतियchar shabd chitra
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[09 Feb 2010 22:59 PM]



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