सीधी ऊँगली से

देख कबीरा वह पढ़ी-लिखी समझदार लड़की थी। दहेज की कट्टïर विरोधी, उसने यह शादी की ही इस शर्त पर थी कि दहेज की कोई माँगें नहीं होगी। उसके पिता ने अपने हैसियत के हिसाब से जो भी बन पड़ा, दिया था।कुछ दिन बीते भी। उसकी सास ने उसे दहेज के ताने देने शुरू कर दिया।तुम्हारे... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

लघुकथा

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[09 Feb 2010 22:50 PM]

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