उत्तरा की मांग
"मै युद्ध प्रयाण कर रहा हूँ | पिताजी आज यहाँ नहीं है | अपने हाथ दिखाने का स्वर्णिम अवसर आया है | श्री कृष्ण ने कहा है कि ऐसा अवसर भाग्यवान क्षत्रिय को ही मिलता है | मुझ पर आज भाग्य प्रसन्न हुआ है |"उसकी आँखे नीची ही रही |' मै महारथियों से भिडूगा - अकेला...
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Ratan Singh Shekhawat
स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से
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[09 Feb 2010 21:05 PM]



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