किसके नाम पर लड़े
किसकी धज्जियाँ हैं उड़ींकिसके नाम पर लड़ेजिसके लिए लड़े हो तुमइन्सानियत शर्मसार हैकोई सुनता नहीं जो आवाजेंदँगा-फसाद , आगजनीसदियों तलक कराहतीपीढ़ियों का कौन जिम्मेदार हैनिशाने पर है भाईचारासाजिशों का न शिकार होमजहब तो सिर्फ रास्तासबकी मंज़िल एक हैइन्सानियत...
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शारदा अरोरा
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[09 Feb 2010 21:20 PM]



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