यह जवानी है मेरे दोस्त, इसे परदे क्या छिपाएं

जीवन के पदचिन्ह नाकिस सा गुस्सा उसका, बड़ी भोली सी अदाएँयह जवानी है मेरे दोस्त, इसे परदे क्या छिपाएं शिकवा उन्हें कि हिचकी नहीं आती, याद नहीं करतेकभी भूले ही नहीं जिसे, उसे कोई कैसे याद दिलाएं कासिद के साथ ही आई थी कुछ भीगी सी... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

ग़ज़ल

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[09 Feb 2010 14:00 PM]

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