मयखाने में महंगाई
एक अजब से ' पोस्चर' में मनोज कुमार अपने चेहरे पे हाथ रख लिया करते थे , बस यही याद करके हँसते हैं लोग आज इस जीनिअस फिल्मकार पर । भूल गए हैं कमबख्त , ना-शुक्रे कि क्या-क्या रतन दिए इस आदमी ने उस ज़माने में जब लोग फिल्म को समाजी बदलाव का हथियार कहें या नहीं...
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मुनीश ( munish )
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[09 Feb 2010 12:45 PM]



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