“दिन आ गये हैं प्यार के” (मयंक)

नन्हें सुमन खिल उठा सारा चमन, दिन आ गये हैं प्यार के। रीझने के खीझने के, प्रीत और मनुहार के।। चहुँओर धरती सज रही और डालियाँ हैं फूलती, पायल छमाछम बज रहीं और बालियाँ हैं झूलती, डोलियाँ सजने लगीं, दिन आ गये शृंगार के। रीझने के खीझने के, प्रीत और मनुहार के।। झूमते हैं... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

गीत

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[09 Feb 2010 12:23 PM]

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