मुरली तेरा मुरलीधर - 43
भू लुण्ठित हो धूलिस्नात हो जाय न जब तक तन मधुकर।वह निज कर में ले दुलराये तेरा लघुप्रसून निर्झरविलख भले सुरभित न किन्तु वह पदसेवा से करे न च्युतटेर रहा सेवासुखोदग्मा मुरली तेरा मुरलीधर।२३१।आभूषण क्या प्रिय संगम रोधक प्राचीर नहीं मधुकरहो सकती है एकमेव फिर...
[पूरी पोस्ट]
हिमांशु । Himanshu
मुरली तेरा मुरलीधर
15
0
0
0
0
[09 Feb 2010 12:09 PM]



Shuffle








