हम पथिक कंटीली राहों के
हम पथिक कंटीली राहों के,फूलों पर चलना क्या जाने?जिसने अरुणोदय देखे हो,संध्या का ढलना क्या जाने?हम देश प्रेम के मतवाले, भिड़ते हैं तरल तरंगो से,गौरव मद अविरल टपक रहा,जीवन के अंग प्रयत्नों से.जिसने सूरभोग पिलाए हो वह जहर उगलना क्या जाने?हम...
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राहुल पंडित
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[09 Feb 2010 11:21 AM]



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