कुछ दोहे
धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का शाप नेता गर तू बन गया , कर्म ना अपना भूलसच्ची सेवा कर सदा यही धर्म का मूलव्यापारी है तू अगर , नानक से कुछ सीखसच्चा सौदा कर सदा, मानव जैसा दीखबना चिकित्सक तो सदा, जान बचा निष्पाप धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का...
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योगेश स्वप्न
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[09 Feb 2010 10:39 AM]



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