दिल्ली ब्लॉगर मीट-एकदम झूठ...बिल्कुल झूठ
अरे काहे का मीट?...किसका मीट?...सब बकवास इतना झूठ?...तौबा...तौबा...कुछ तो उपरवाले के कहर से डरो...कुछ तो उसके ताप से घबराओ...जिसे देखो वही जो मन में आए बके चले जा रहा है...मीट...मीट...मीट अरे!...काहे का मीट?...किसका मीट?... किसका?...किसका कत्ल हुआ...
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राजीव तनेजा
राजीव तनेजा
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[09 Feb 2010 10:54 AM]



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