जनाब सरवर की ग़ज़ल : 10
ग़ज़ल १० कहाँ से आ गए तुम को न जाने बहाने और फ़िर ऐसे बहाने ! कोई यह बात माने न माने मुझे धोखा दिया मेरे ख़ुदा ने ! ज़माना क्या बहुत काफी नहीं था ? जो तुम आए हो मुझको आज़माने ! लबों पर मुह्र-ए-ख़ामोशी लगी है दिलों में बन्द हैं कितने फ़साने ! न मौत अपनी न अपनी...
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आनन्द पाठक
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[09 Feb 2010 09:47 AM]



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