दानिश की कुछ गज़लें
एकसफ़र को और कुछ दुश्वार करते,अभी मंजिल को तुम इन्कार करते.ये क्या कि उम्र भर चारागरी की,किसी को इश्क़ मे बीमार करते.तो एक दिन तुमसे खुशबू आने लगती,अगर फूलों का कारोबार करते.तमन्ना है ये दिल मे तेरी खातिर,किसी दिन हम भी दरया पार करते।तो फिर ऐसा हुआ कि रो...
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योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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[09 Feb 2010 09:49 AM]



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