लगी हाथ में है प्यार की इक किताब अभी अभी

दर्पण के टुकड़े अब देखिये क्या रंग दिखाता है रेड रोज़उन्हें आज हमने दिया है इक गुलाब अभी अभीउस फूल में भी दिल मेरा आये उसे नजरदिल के लहू से है रंगा गुलाब अभी अभीता उम्र बदली करवटे ना नींद थी ना ख़्वाब थालगी आँख तो दिखा तेरा है ख़्वाब अभी अभीता उम्र मिले जख्म तो अब जा के... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[09 Feb 2010 09:22 AM]

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