मै जानता हूं

laghukahani हमें पता थाहम हो नहीं सकेंगेएक-दूजे केफिर भीफूट ही गईं कोंपलेंप्यार की।बिछुडऩे का गमरुला जाता था जब कभीतुम कहती थीचिंता मत करोकहीं भी हो मेरा ब्याहमैं अपने उनकोले आऊंगी उसी शहरजहां तुम रह रहे होंगेमजे की बात देखोतुम्हारी डोली जिस शहर में आईनौकरी मुझे भी... [पूरी पोस्ट]
writer shivraj gujar

रचना संसार

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[09 Feb 2010 08:23 AM]

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