भाषा

मनोज भाषा जीवन के किसी भी मोड़ पर जब भी तुम रोये हो ऐसे बहुतों ने पोछे हैं तुम्हारे आंसू जिनकी भाषा को तुमने हमेशा ही समझा है बहुत झोटा करके, बिताई होंगी कितनी रातें उन्हीं छोटी भाषा वाले लोगों ने छटपटाते हुए सिर्फ देखने के लिए एक टुकड़ा सुख तुम्हारी... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी
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[09 Feb 2010 08:01 AM]

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