जिंदादिल-हिंदी शायरी (jindadil-hindi shayri)

 हिन्द केसरी-पत्रिका कभी कोई आंखें कातर भाव से तुम्हारी तरफ ताकती हैं क्या उन पर रहम खाते हो? उठते नहीं हाथ मांगने के लिये पर उनकी छोटी चाहतें तुम्हारे सामने खड़ी होती हंै क्या उनको पूरा कर पाते हो? उठा रहे हैं बरसों से जो कंधे जमाने का बोझ क्या उनकी पीठ सहलाते हो? कोई थक गया... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[07 Jul 2009 19:11 PM]

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