घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

 हिन्द केसरी-पत्रिका छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूसरी महिला बोली ‘अरे, घर पर रोना होता है इसलिये मनोरंजन के लिये यहां हम आते हैं पता नहीं तुम जैसे लोग घर का रोना यहां क्यों लाते हैं अब बताओ क्या सास ने... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[16 Oct 2009 10:01 AM]

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