ठेठ जीवन के उच्छलित स्त्रोतों के समीप \शिरीष कुमार मौर्य की कविता पर पंकज चतुर्वेदी
शिरीष कुमार मौर्य ने बहुत धीरज, गम्भीरता, संयम और निष्ठा से ऐसी कविता सम्भव की है, जिसमें जीवन-द्रव्य की सान्द्रता है और आत्मतत्व की उदात्तता। यह इस बदौलत कि एक ओर उसमें इस दुनिया से गहरा और निबिड़ प्यार है, दूसरी ओर साधारण इंसान के दुखों से प्रतिबद्ध...
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Ek ziddi dhun
शिरीष कुमार मौर्य
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[09 Feb 2010 06:51 AM]



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