ग़ालिब,जेस्सिका और मैं भी
यहाँ,भावनाओं की रेश ड्राइविंग में ,'सीट बेल्ट' पहना हुआ,शॉक रेजिसटेंस दिल ,उछल के ...बाहर नहीं निकलता.आंसू भी ,'एटीकेट' के 'नेपकिन' में......सूख जाते हैं.ये जिंदा सड़कों के नीचे,मरे हुए कोलतारों की दिल्ली है.यहाँ हर रिश्ते का एक बारकोड हैहर प्रेम का एक...
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[09 Feb 2010 05:29 AM]



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