कह रहीं बालियाँ गेहूँ की : डॉ॰ नागेश पांडेय संजय का एक बालगीत
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की मधुर कान में काली कोयल गाए मस्त मल्हार!बाँट रहे हैं फूल सभी को ख़ुशबू का उपहार!पेड़ों ने पहनी है कोमल-नई-मनोहर वर्दी!भीनी-भीनी धूप निकलने लगी कम हुई सर्दी! लदे बौर से पेड़ आम के मस्त हवा संग झूमें!सुध-बुध छोड़ तितलियाँ सरसों पर...
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रावेंद्रकुमार रवि
बालगीत
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[09 Feb 2010 04:53 AM]



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