एक महिला पत्रकार की जुबानी, पत्रकारिता का विध्वंश चरित्र !
ये एक हकीकत है जिसे मेरी महिला मित्र ने कहानी का रूप दिया है, नाम बदल दिए गए हैं मगर हकीकत को ज्यों का त्यों आपके सामने रखा गया है. कहानी के किरदार पत्रकार महोदय को मैं भी जनता हूँ और एक और बार ऎसी कहानी के करण इन से मुखातिब भी हो चुका हूँ.मैं चाहता था...
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रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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[09 Feb 2010 02:51 AM]



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