कल्पना से परे है अपराध
नमस्कार साथियों,मंजिल को भूलकर, रास्तों पर ध्यान दिया।अब मिल गई है मंजिल, रास्तों के कारण।हमेशा मैंने रास्तों पर ध्यान दिया है। इसके चलते आज दूर ही सही, लेकिन मंजिल नजर आ रही है। विचारों को व्यक्त करने के लिए ब्लाग को माध्यम बनाया है। आज मेरा पारखी नजर...
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crimnal
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[18 Nov 2009 13:25 PM]



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