९१ कोजी होम

भंगार हम सभी सहायक ,गुलज़ार साहब की सिगरेट चुरा के पीते थे ।सभी सहायक गरीब ही थे ,और सब को सिगरेट पीने का शौक था ...डड़ू , राज सिप्पीको हम लोग बुलाते थे ....वही एक पैसे वाले थे ५५५ नाम की सिगरेट पीते थे ,बड़ीमुश्किल से एक सिगरेट देते थे ....महंगी जो होती थी ।... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार

९१ कोजी होम

views
22
upvote
0
downvote
1
rating
-1
comments
0
[09 Feb 2010 02:19 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix