९१ कोजी होम
हम सभी सहायक ,गुलज़ार साहब की सिगरेट चुरा के पीते थे ।सभी सहायक गरीब ही थे ,और सब को सिगरेट पीने का शौक था ...डड़ू , राज सिप्पीको हम लोग बुलाते थे ....वही एक पैसे वाले थे ५५५ नाम की सिगरेट पीते थे ,बड़ीमुश्किल से एक सिगरेट देते थे ....महंगी जो होती थी ।...
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भंगार
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[09 Feb 2010 02:19 AM]



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