तकदीर इतनी तो बेरहम हो मुझ पर
तेरे शहर में कुछ दिन ज़िन्दा रहूं तेरा इतना तो रहम हो मुझ परखुदा का नाम तेरे बाद आयेतेरा इतना तो करम हो मुझ परवो दीवार गिरे जो तुमने उठाये हैंवो आग बुझे जो तुमने लगाये हैंकिसी दिन बारिश हो इस वीराने मेंआंखों से इतनी रमझम हो मुझ पर वो अपने घर में, मैं...
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ritu raj
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[09 Feb 2010 01:24 AM]



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