स्वयं को समय दे पाना भी दूभर I
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में इंसान इस कद्र लिप्त हो चुका है कि अपने-आपको समय दे पाना भी दूभर हो गया है. ऐसे में वह कह उठता है :-ज़रा देर में आना ऐ होश Iअभी कहीं मै गया हुआ हूँ IIhttp://www.thenetpress.com/...
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Akbar Khan
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[09 Feb 2010 01:07 AM]



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