स्वयं को समय दे पाना भी दूभर I

रज़िया मिर्ज़ा आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में इंसान इस कद्र लिप्त हो चुका है कि अपने-आपको समय दे पाना भी दूभर हो गया है. ऐसे में वह कह उठता है :-ज़रा देर में  आना  ऐ होश Iअभी कहीं मै गया हुआ हूँ IIhttp://www.thenetpress.com/... [पूरी पोस्ट]
writer Akbar Khan

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[09 Feb 2010 01:07 AM]

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