बस इतना सा ............

zakhm मैं नही कहताआसमाँ से चाँदतोड़कर लाऊँगा नहीं कहतातारों सेमाँग सजाऊँगामैं नही कहतातेरे लिएआग का दरियापार कर जाऊंगानहीं कहतातूफानों कारुख मोड़ दूँगाकोई वादानही करताकोई कसमनही उठाताबसधड़कन कीहर तालके साथपलकों कीगिरती -उठतीचिलमन के साथसाँसों कीनिर्बाध गतिके... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[09 Feb 2010 01:00 AM]

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