गुस्से में लिखी एक कविता
इन दिनों बेहद मुश्किल में है मेरा देशदरवाज़े की कोई भी खटखट हो सकती है उनकी ज़रूरी नही कि रात के अंधेरों ही में हो उनकी आमदकिसी भी वक़्त हमारी ज़िंदगी मेंउथल-पुथल मचा सकती है उन बूटों की आवाज़इन दिनों संविधान की तमाम धारायें संवेदनशील हैंकविताओं के बाहर...
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अशोक कुमार पाण्डेय
कविता
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[08 Feb 2010 23:21 PM]



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