याद तुम्हारी आई (गीत)

काव्य तरंग फिर सज गई शाम सिंदूरीमैसम ने ली अंगड़ाईमुझे याद तुम्हारी आई ......फूलों पर गुन गुनाए भ्रमरहर कली कली शरमाईमुझे याद तुम्हारी आई ......हंस हंसिनी चले रे घर कोचातक का कटा कलेशचंदा ने भी अम्बर सेकैसी प्रेम सुधा बरसाईमुझे याद तुम्हारी आई ....राह तकत तट थकी... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

प्रेम गीत

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[08 Feb 2010 19:37 PM]

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