खता

दर्पण खता हम गल्तियाँ अक्सर रोज़ ही किया करते हैं,ये भी सच है  के  दोष दूजे को  दिया  करते  हैं ये   फितरत   है,   शरारत  है  या  नादानी  कोई,सबक लेने   की न सोच... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

दर्पण के पन्नो से

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[08 Feb 2010 12:45 PM]

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