सामयिक कविता: संजीव 'सलिल'
सामयिक कविता:संजीव 'सलिल'*हर चेहरे की अलग कहानी, अलग रंग है.अलग तरीका, अलग सलीका, अलग ढंग है...*भगवा कमल चढ़ा सत्ता पर जिसको लेकरगया पाक बस में, आया हो बेबस होकर.भाषण लच्छेदार सुनाये, सबको भये.धोती कुरता गमछा धारे सबको भाये.बरस-बरस उसकी छवि हमने विहँस...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[08 Feb 2010 10:59 AM]



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