बानगी बनारस की (दो)

यार कहानी - अरविन्द चतुर्वेद -वे सिंह हैं, उपाध्याय हैं, राय हैं कि जायसवाल हैं, लेकिन हैं काशीनाथ! कचौड़ीगली जाते हैं तो काशीफल की तरकारी और कचौड़ी के लिए मुंह में पानी आ जाता है. बाज़ार जाते हैं सब्जी का थैला लेकर तो कुछ खरीदें या नहीं, मगर गोल, चिपटे, हरित-पीताभ... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[08 Feb 2010 11:11 AM]

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