दर्द ज्यादा है और मौत करीब

पहलू दर्द ज्यादा है और मौत करीबधूप-छांह और अकुलाहट भरी उमस के बीचखुले निचाट में मैं लेटा हुआ हूंमेरे लोग मुझे देखकर छिप-छिप जाते हैंजैसे मैं अभी उठूंगा और उन्हें खोज लूंगामां मेरी उठकर कहीं दूर चली जाती हैकि जैसे लौटेगी तो भला-चंगा मिलूंगा उसेमैं भी कुछ देर... [पूरी पोस्ट]
writer चंद्रभूषण

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[08 Feb 2010 08:15 AM]

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