फागुन मतवारो यह ऐसो परपंच रच्यौ..

सच्चा शरणम् ’आचारज जी’ का आह्वान सुन लपके ही थे कि तिमिरान्ध हो गये (यूँ फगुनान्ध होने को बुलाये गये थे ) । बिजली फिर ब्रॉडबैण्ड - दोनों ही रूठ गये । उस वक्त जो लिखा था, पोस्ट नहीं कर पाया । अभी कर रहा हूँ, कारण खुद को जोड़ने की क़वायद है महोत्सव से -(१)ठौर-ठौर... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

होली है

views
35
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
21
[08 Feb 2010 07:35 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix