मेरी कविता के बिखरे टुकड़े...

अंतर्द्वंद का आइना 1.पतंग डोर मेरे हाथ मेंसरसर उड़ती पतंग,जैसे ईश्वर और इंसान का संग।2.पंखापंखा घूमें कमरे मेंहवा में फैले तरंग,जैसे कर्म भाग्य का संग।3.शराबतन में उतर कर शराबतनकर बाहर आए,जैसे सफलता इतराए।4.अखबारआजकलमैं पढता नहीं अखबार,एक ही ख़बरबार-बार।... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha

Hindi-Poems

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[08 Feb 2010 06:34 AM]

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