ले जाना है मुझे........!

कलरव समय का सामनानिष्ठा से होकुछ भी कठिन नहींचट्टान सी समस्या भीदरकने लगती है.....।उसके बीच सेराह खुद-ब-खुदआमंत्रण दे रही होती हैं....देखो.....मैं राह हूंआओ ..!ले जाना है मुझे.....!वहांजहांमंजिल के पारऔर भी बहुत कुछ हैक्योंकि जानता हूं मैंमंजिल तो बस ...एक... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त कुमार

राह

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[08 Feb 2010 06:20 AM]

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