मैं कविता लिखा करता था
तारों भरी रात में,चाँदनी की बरसात में,शब्दों के जुगनुओं से,आने वाली काली रातों को भी रोशन करता था,मैं कविता लिखा करता था,लिखता था मैं कुछ अपने लिए,दिल की बातें खुद से बोला करता था,बस कागज़ कलम थे साथी मेरे,मैं उनसे खेला करता था,मैं कविता लिखा करता था,अपने...
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Gurnam Singh Sodhi
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[08 Feb 2010 00:59 AM]



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